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जूस थेरेपी द्वारा शरीर में होने वाले लाभ और हानि । Advantages and disadvantages of body through juice therapy.

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Juice Therapy रस चिकित्सा जूस थेरेपी द्वारा शरीर में होने वाले लाभ और हानि । Advantages and disadvantages of body through juice therapy. जूस थेरेपी,  Juice therapy शरीर   के शुद्धिकरण, रोग मुक्ति और शक्ति स्फूर्ति व रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी के लिए जूस थेरेपी,  Juice therapy   बेजोड़ है। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में यह प्राकृतिक उपचार अपनाने से कायाकल्प हो जाता है। दोस्तो आइये जाने कुछ चुनिंदा फल-सब्जियों द्वारा जूस थेरेपी, Juice therapy  के वारे में और उनसे क्या-क्या लाभ और हानि हो सकती है कैसे इसका सेवन करें : फल-सब्जियों के रस (Juice) या रसाहार द्वारा चिकित्सा प्रायः सभी रोगों में उपयोगी हो सकती है। लेकिन इसका प्रयोग किस रूप में किसको करना चाहिए, इसके पीछे वैज्ञानिक तथ्य जुड़े होते हैं। रसों का प्रयोग कब करें और कब नहीं करना चाहिए यह भी जानना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि विभिन्न रसों के गुण धर्म जानना।        रस या Juice का प्रयोग स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायी है यह तो सभी जानते हैं, लेकिन साथ ही यह भी जान...

Ayurvedic remedy for high uric acid lable:

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Symptoms, causes and treatment of uric acid Symptoms of uric acid Pain in legs and joints. Pain in heels. Swelling of the lumps. Severe joint pain in the morning and evening. Unbearable pain in the feet and ankles in getting up after sitting for long at one place. Then the pain becomes normal. Swelling of legs, joints, fingers, lumps. Sugar label increases. In case of such problem, uric acid test should be done immediately. Methods of controlling uric acid Make the powder by taking equal quantity of Gokhru, Punarwa's root, dry gooseberry, take one teaspoon each in the morning, on an empty stomach in the morning and half an hour before eating in the evening. By doing this, uric acid problem will be eliminated from the root. On increasing uric acid, eat a diet rich in hydraulic fiber. Spinach, broccoli, oats, oatmeal, isabgol husk are beneficial. Radish 3-4 inch long piece, cucumber 3-4 inch long piece, bitter gourd 3-4 inch long piece, fou...

मर्दाना शक्ति बढ़ाने के लिए घरेलू उपाय। Mardana shakti badhane ke liye gharelu upaye।

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मर्दाना शक्ति बढ़ाने के लिए घरेलू उपाय। Home remedies to increase masculine power। बेहतर यौन संबंध के लिए घरेलू नुस्खे: इसी तरह यौन संबंध अन्य बातों के अलावा वैवाहिक जीवन को प्रभावी बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी तरह, दंपति के बीच एक सभ्य यौन संबंध होना अनिवार्य है। कैसे जोड़े अपने यौन संबंध को घरेलू इलाज के माध्यम से सुखद और बेहतर बना सकते हैं, आइए जानते हैं: सुबह और शाम को दूध में पकाए गए 2-4 अंजीर खाएं और ऊपर से दूध पिएं। इसके उपयोग से शरीर में नई ताकत आती है। 7-7 ग्राम अश्वगंधा पाउडर, मिश्री और शहद मिलाकर 15 ग्राम गाय के घी में मिलाकर प्रतिदिन दिन में दो बार सेवन करने से शारीरिक गुणवत्ता में वृद्धि होती है। 50 ग्राम उड़द या उड़द की दाल पानी में भिगोकर छिलका अलग कर दें। इसके बाद इसे घी में उबालें, दूध, चीनी, बादाम, सूखे अंगूर और इन सब को मिलाकर खीर बनाएं, और इस खीर को खाएं। इसका मानक उपयोग यौन बल में वृद्धि करता है। 10-10 ग्राम शहद, अदरक का रस, प्याज का रस और 5 ग्राम घी इन सबको एक साथ लेने से यौन शक्ति बढ़ती है। इस समाधान को दिन में सुबह के समय 21 ...

हर्निया का आयुर्वेदिक उपाय । Ayurvedic treatment of hernia ।

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हर्निया के लक्षण और कारण, Harniya ke lakshan & karan in hindi: हर्निया एक ऐसी स्थिति है जिसमें एक वसायुक्त ऊतक या अंग एक प्रावरणी के माध्यम से धकेल दिया जाता है, मांसपेशियों में एक कमजोर स्थान या विशिष्ट अंग के आसपास संयोजी ऊतक पाया जाता है। इसके परिणामस्वरूप कई लक्षण दिखाई देते हैं, जिनमें से सबसे आम है, सभी के पेट में दर्द होता है। मुख्य तौर पर, हर्निया का सबसे मुख्य कारण ऊतक या अंगों के आसपास दबाव होता है, जो उन्हें विस्थापित करने और मांसपेशियों के माध्यम से निचोड़ने के लिए पर्याप्त मजबूत होता है। नतीजतन, यहां तक ​​कि खांसी, छींकने, या अपने पेट की मांसपेशियों के लिए उचित तैयारी के बिना भारी वस्तुओं को उठाने के रूप में कुछ भी इस स्थिति का कारण बन सकता है। अतः इस पर, तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है जो आप हर्निया के लिए कुछ बुनियादी घरेलू उपचारों पर भरोसा कर सकते हैं। हर्निया आपके शरीर के एक विशिष्ट क्षेत्र पर लागू अत्यधिक दबाव या तनाव के कारण होता है, कुछ चीजें हैं जिनके कारण हर्निया होने की संभावना अधिक होती है।  उदाहरण के लिए- एक महिला को जन्म देने के बाद...

मुंह की साफ-सफाई बेहद जरूरी है। Cleanliness of the mouth is very important ।

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मसूड़ों व दांतों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए जरूरी है, मुंह की साफ-सफाई :- सुडौल व चुस्त-दुरुस्त शरीर ही अच्छी सेहत का मतलब नहीं होता, बल्कि इसमें शामिल शरीर के सभी अंगों की सेहत होती है। इसी लिए हमें सेहतमंद बने रहना है तो शरीर के सभी अंगों की साफ-सफाई पर ध्यान देना होगा। इस कड़ी में मुंह की साफ-सफाई का सबसे पहले नंबर आता है। अपने दांतों व मुंह की साफ-सफाई को लेकर जो लोग लापरवाही बरतते हैं, उन लोगों के मुंह से बदबू आने की समस्या, दांत पीले व दाग-धब्बे होने की समस्या, कैविटी, मसूड़ों से मवाद व खून आने की समस्या, दांतों में दर्द व दांतों में कीड़ा लगना आदि कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।और इन सबके अलावा मुंह की साफ-सफाई में लापरवाही बरतने की वजह से उत्पन्न होने वाली समस्याएं जैसे हार्ट डिजीज सहित कई और गंभीर किस्म की बीमारियों का भी खतरा बढ़ सकता है। अतः मुंह व दांतों की साफ-सफाई बहुत ही जरूरी है। मुंह की साफ-सफाई से संबंधित निम्नलिखित सुझावों पर जरूर ध्यान देना चाहिए। रोजाना रात को सोने से पहले तथा सुबह को ब्रश जरूर करना चाहिए। ब्रश और टूथपेस्ट ...

बालों से संबंधित समस्याओं के लिए उपयोगी घरेलू प्रयोग। Useful home use for hair related problems.

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बालों की समस्त समस्याओं का घरेलू उपचार। दोस्तो आज के समय में लगभग हर स्त्री, पुरुष बालों की किसी न किसी समस्या से परेशान है। किसी के बाल दोमुहे हैं, किसी के बाल झड़ रहे हैं, तो कोई व्यक्ति सिर में रूसी (डैंड्रफ) से परेशान है। आज हम इन सभी समस्याओं का समाधान लेकर एक बार फिर से हाजिर हैं, तो आइये जानते हैं बालों से संबंधित सभी समस्याओं से निजात पाने के लिए कुछ प्रमुख कारगर घरेलू प्रयोग इस प्रकार हैं- बालों के झड़ने का उपचार (Treatment for hair fall) प्रयोग विधि: यदि बाल दोमुहे हो गये हों और इनकी वृद्धि बाधित हो रही हो, तो बालों की जड़ों में आंवले का चूर्ण और नीबू का रस मिलाकर लगाने से बाल जल्दी बढ़ते हैं। आंवले के चूर्ण को रात में लोहे की कड़ाही में पानी में भिगोकर रख दें। सुबह में इस पानी में नीबू निचोड़कर बालों में लगाकर थोड़ी देर के लिए छोड़ दें, फिर मसाज करते हुए सादे पानी से बाल धोएं। नियमित रूप से यह प्रयोग अपनाने से 1 माह में काले, लंबे, घने और मुलायम हो जाते हैं। 100 मि ली नारियल के तेल में 3 ग्राम कपूर पीसकर मिलाएं और इस तेल को किसी शीशी में भरकर ...

बच्चेदानी में सूजन का घरेलू उपचार। लक्षण तथा कारण। Home remedies of inflammation in the uterus. Symptoms and causes.

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आधुनिक समय में वातावरण के बदलाव और अनुचित-खान-पान के कारण अधिकांश स्त्रियों की बच्चेदानी में सूजन (Uterine inflammation) आ जाती है। बदलता हुआ वातावरण गर्भाशय (Uterus) को बहुत प्रभावित करता है, जिस कारण स्त्रियों में यह समस्याएं अधिक देखने को मिलती हैं। इसी वजह से स्त्रियों के पेट में असहनीय दर्द, ज्वर, सिर में दर्द तथा कमर के दर्द का सामना करना पड़ता है। जल्द ही इस समस्या का उपचार न होने पर यह समस्या कैंसर जैसी बीमारी का सबव बन सकती है। अतः हमें चाहिए डाॅक्टरी इलाज के अलावा घरेलू उपचार करके भी स्त्रियों की इस समस्या को दूर कर सकते हैं। दोस्तो हम आज आपको  बच्चेदानी में सूजन (Uterine inflammation) से संबंधित कुछ घरेलू प्रयोग बताने जा रहे हैं, जिनकी सहायता से आप इस समस्या को दूर करके बड़ी बीमारियों से दूर रह सकती हैं। आइये जानें इन समस्याओं को जड़ से नष्ट करने के लिए घरेलू उपाय। बच्चेदानी में सूजन के कारण (Causes of inflammation in the uterus) वातावरण में बदलाव के कारण। औषधियों के अत्यधिक सेवन करने से। अत्यधिक तथा बहुत कम व्यायाम करने से। भूख से ...

सुबह बिस्तर छोड़ने के बाद रहें ज्यादा सावधान। बिस्तर से उठने का सही तरीका। नुकसानदेह है उंगलियों को चटकाते रहना। उंगलियां चटकाने से नुकसान।

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आइये जानते हैं क्या करना चाहिए बिस्तर छोड़ते समय। सुबह का समय सेहत के लिए सबसे अच्छा माना जाता है, इसीलिए हर तरह के ट्रीटमेंट में, चाहे वो माॅडर्न हो या फिर पुरानी पारंपरिक, सुबह बिस्तर से जल्दी उठने पर जोर दिया जाता है। लेकिन इस बात की जानकारी सभी को होनी चाहिए सुबह बिस्तर से उठने के बाद हमें क्या करना है और किन-किन गलतियों को नहीं करना है।

गले में इंफेक्शन का इलाज इन हिन्दी। गले के इंफेक्शन में बरतें पूरी सावधानी।

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गले के इंफेक्शन का घरेलू उपचार। बदलते मौसम में तापमान में धीरे-धीरे गिरावट आने लगती है और रात में सर्दी व दिन में गरमी का मिला-जुला प्रभाव कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं के रूप में सामने आता है। अतः इस मौसम में सेहत की देखभाल को लेकर खासतौर पर सजग रहने की आवश्यकता होती है। बदलते हुए मौसम में परेशानी का कारण बनने वाली समस्याओं में मुख्य है गले का इंफेक्शन । मौसम में बदलाव के दौरान अधिकांश गले में खराश की शिकायत हो जाती है, जो एक प्रकार का वायरल इंफेक्शन होता है, और इसके साथ ही हल्का सा बुखार, सुस्ती व थकान, मितली, बदन दर्द आदि लक्षण भी देखने को मिलते हैं। ऐसी दशा में निम्नलिखित उपायों को अपनाना फायदेमंद हो सकता है। गरम पानी में नमक डालकर कुल्ला व गरारे करें। भाप लें, यह अंदर जमा हुआ बलगम बाहर निकालने में मदद करती है। गरम तरल पदार्थों का सेवन अधिक करें। लिक्विड भरपूर मात्रा में लेते रहना चाहिए। धूम्रपान से दूर रहना चाहिए। फ्रीज का ठंडा पानी, कोल्ड ड्रिंक आदि नहीं लेना चाहिए। ज्यादा तले-भुने व मसालेदार खाने से परहेज बरतना चाहिए। छींकते-खांसते समय नाक व मुंह पर रुमाल र...

नारियल का तेल सेहत के लिए उपयोगी है : नारियल के तेल के फायदे। Benefits of coconut oil.

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जानें, क्यों नारियल का तेल हमारी सेहत के लिए उपयोगी है। Learn why coconut oil is useful for our health. घर-घर में इस्तेमाल किया जाने वाला नारियल का तेल यानी (Coconut oil) सेहत और सौंदर्य को संवारने के लिहाज से खासतौर पर उपयोगी है। खाने से लेकर लगाने तक इसके अनगिनत फायदे हैं। इसलिए सर्दियों के मौसम में इसका इस्तेमाल ज्यादा बेहतर रहता है। नारियल का तेल (Coconut oil) की कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं- नारियल का तेल (Coconut oil) में 50 प्रतिशत लैरिक एसिड पाया जाता है, जो हार्ट से जुड़ी कई तरह की समस्याओं को कंट्रोल करने में खासतौर पर कारगर है।  भोजन में नारियल के तेल (Coconut oil) का प्रयोग करने से अच्छा कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ता है और बेकार कोलेस्ट्रॉल लेवल को संतुलित (Balanced) करने में मदद करता है। नारियल तेल (Coconut oil) के प्रयोग से ब्लडप्रेशर भी कंट्रोल में रहता है। नारियल तेल (Coconut oil) का लगातार प्रयोग मसल्स के लिए लाभदायी है। नारियल तेल (Coconut oil) के प्रयोग से अल्जाइमर सहित ब्रेन से जुड़ी तरह-तरह की समस्याओं से छुटकारा मिलता है। नारियल ...

मानसिक तनाव को दूर करने के लिए उपाय। मानसिक शांति के लिए अपनाएं श्वासन। मानसिक शांति के लिए अपनाएं योग।

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मानसिक शांति के लिए अपनाएं श्वासन दोस्तो मनुष्य जीवन भर सदैव एक जैसा नहीं रहता उसे आये दिन तरह-तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, तथा तमाम जिंदगी उतार-चढ़ाव आते ही रहते हैं। यह सिलसिला विशेषकर युवावस्था के बाद घरेलू, सामाजिक, आर्थिक दबाव काफी अधिक हो जाता है। इन्हीं मानसिक दबाव और मानसिक चिंताओं का हमारे मन, मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव पड़ता है। आज हम इन्हीं समस्याओं का समाधान एक योग के द्वारा बताने की कोशिश कर रहे हैं।  श्वासन करने की विधि इस प्रकार है- पीठ के बल फर्श पर लेट जाएं और सजग रहते हुए 5-6 गहरे श्वास-प्रश्वास की क्रिया करें। सजग रहते हुए आंखों को खूब ढीला व हल्का बंद रखें। हाथों को शरीर के बगल में फर्श पर रखें। हथेलियों को ऊपर की ओर खुला रखें। पैरों को आराम की स्थिति में रखते हुए 1 फुट के अंतर पर कर लें। पूरे शरीर को ढीला व शिथिल छोड़ दें। शरीर को पूरी तरह से स्थिर रखें, कोई भी अंग हिलने-डुलने न पाए। अब अपने मन को सहज श्वास-प्रश्वास के प्रति जागरूक बनाएं। मन-ही-मन श्वास-प्रश्वास की गिनती करें। शुरू में उल्टी गिनती में 30 श्वास-प्रश्वास गिनें। उदाहरण क...