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जूस थेरेपी द्वारा शरीर में होने वाले लाभ और हानि । Advantages and disadvantages of body through juice therapy.

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Juice Therapy रस चिकित्सा जूस थेरेपी द्वारा शरीर में होने वाले लाभ और हानि । Advantages and disadvantages of body through juice therapy. जूस थेरेपी,  Juice therapy शरीर   के शुद्धिकरण, रोग मुक्ति और शक्ति स्फूर्ति व रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी के लिए जूस थेरेपी,  Juice therapy   बेजोड़ है। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में यह प्राकृतिक उपचार अपनाने से कायाकल्प हो जाता है। दोस्तो आइये जाने कुछ चुनिंदा फल-सब्जियों द्वारा जूस थेरेपी, Juice therapy  के वारे में और उनसे क्या-क्या लाभ और हानि हो सकती है कैसे इसका सेवन करें : फल-सब्जियों के रस (Juice) या रसाहार द्वारा चिकित्सा प्रायः सभी रोगों में उपयोगी हो सकती है। लेकिन इसका प्रयोग किस रूप में किसको करना चाहिए, इसके पीछे वैज्ञानिक तथ्य जुड़े होते हैं। रसों का प्रयोग कब करें और कब नहीं करना चाहिए यह भी जानना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि विभिन्न रसों के गुण धर्म जानना।        रस या Juice का प्रयोग स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायी है यह तो सभी जानते हैं, लेकिन साथ ही यह भी जान...

बेस्ट फूड हैं ड्राई फ्रूट्स । मुनक्का, अंजीर, खजूर, अखरोट, बादाम

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बेस्ट फूड हैं ड्राई फ्रूट्स शरीर को हमेशा चुस्त-दुरूस्त और एनर्जी से भरपूर बनाए रखने के लिए ड्राई फ्रूट्स सबसे अच्छा नेचुरल सोर्स हैं। अपनी रुचि व पाचन क्षमता आदि का ध्यान रखते हुए इन्हें रोजाना अपने भोजन में सम्मिलित करने से कमजोरी दूर होती है, शरीर सुंदर-सुडौल बना रहता है, इम्यूनिटी बढ़ती है और यौवन बना रहता है। शरीर को स्वस्थ व आकर्षक बनाने के लिए सबसे बेहतर साधन है भोजन। सेहतमंद व खूबसूरत वही हो सकता है, जो अपने खान-पान पर पूरा ध्यान देता है। इसलिए डाइट की क्वालिटी को भूलकर भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। आज की भागदौड़ की जिंदगी में अकसर लोग पोषक तत्वों से भरपूर डाइट नहीं ले पाते, जिसका बुरा नतीजा सुस्ती, थकान, रोग-विकार, असमय बुढ़ापा आदि रूपों में भुगतना पड़ जाता है। ऐसी दशा में ड्राई फ्रूट्स पोषण की दृष्टि से एक बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। डाइट में इन्हें शामिल करने से सेहत-सौंदर्य को संवारने में पूरी मदद मिलती है। मुनक्का मुनक्का एक प्रसिद्ध ड्राई फ्रूट्स है। इसकी तासीर गरम होती है। मुनक्का कई प्रकार के रोग-विकारों से बचाता है तथा शक्ति-स्फूर्ति बढ़ाता है। ...

लिंग में वृद्धि करने के लिए कुछ सामान्य घरेलू उपाय: (Some common home remedies to enlarge penis.)

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 लिंग में वृद्धि करने के लिए कुछ सामान्य घरेलू उपाय: (Some common home remedies to enlarge penis.) 1. व्यायाम और स्ट्रेचिंग:  कुछ व्यायाम और स्ट्रेचिंग तकनीकें लिंग के आकार और कार्य में सुधार करने में मदद कर सकती हैं। जेलीग्रैब, केगल व्यायाम, और स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज कुछ उदाहरण हैं।   2. आहार और पोषण:  संतुलित आहार और उचित पोषण सेहत के लिए महत्वपूर्ण है। कुछ पूरक जैसे विटामिन, मिनरल्स, और हर्बल सप्लीमेंट्स का सेवन भी लाभकारी हो सकता है, लेकिन इन्हें लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श करना आवश्यक है। 3. डिवाइस और उपकरण:  कुछ डिवाइस जैसे एक्सटेंडर और वैक्यूम पंप का उपयोग लिंग वृद्धि के लिए किया जाता है। इनका उपयोग सावधानी से और निर्देशों के अनुसार करना चाहिए। 4. तनाव प्रबंधन और मानसिक स्वास्थ्य:  तनाव और मानसिक स्वास्थ्य का लिंग स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ सकता है। योग, ध्यान, और अन्य तनाव प्रबंधन तकनीकें सहायक हो सकती हैं। 5. स्वच्छता और स्वास्थ्य:  लिंग की स्वच्छता बनाए रखना और नियमित स्वास्थ्य जांच करवाना भी महत्वपूर्ण है। नोट: किसी भी नए उपाय या उपचार को...

गर्मियों में स्वस्थ रहने के कुछ आसान घरेलू उपाय (Some easy home remedies to stay healthy in summer.)

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गर्मियों में स्वस्थ रहने के कुछ आसान घरेलू उपाय (Some easy home remedies to stay healthy in summer.)    गर्मियों में स्वस्थ रहने के लिए कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाए जा सकते हैं: *पेय पदार्थ* - भरपूर मात्रा में पानी पिएं, कम से कम 8-10 गिलास प्रतिदिन। - नींबू पानी, नारियल पानी, छाछ और फलों का जूस पिएं। - बेल का शरबत और तरबूज का रस भी शरीर को ठंडक देते हैं। *भोजन* - हल्का और ताजगी भरा खाना खाएं। - तले-भुने और मसालेदार खाने से बचें। - सलाद, दही, फल और हरी सब्ज़ियां खाएं। *धूप से बचाव* - दोपहर के समय बाहर निकलने से बचें। - सिर को कपड़े या छाते से ढकें। - हल्के रंगों वाले ढीले कपड़े पहनें। *स्वच्छता* - दिन में एक बार नहाएं। - ज्यादा पसीना आने पर दिन में दो बार नहाएं। *अन्य उपाय* - कैफीन और अल्कोहल वाले पेय से बचें। - इलेक्ट्रॉल का सेवन करें ताकि शरीर के खोए हुए मिनरल्स की भरपाई हो सके। - लू लगने के लक्षणों को पहचानें और तुरंत ठंडी और हवादार जगह पर जाएं । जानकारी अच्छी लगी हो तो लाईक, शेयर तथा कमेंट करें।

पौरुष ग्रन्थि का बढ़ जाना (ENLARGEMENT OF PROSTATE GLAND), लिंग की चमड़ी उलट जाना, लिंग मुण्ड का न खुलना, (PHIMOSIS), जन्मजात निरुद्धता (CONGENITAL PHIMOSIS)

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  पौरुष ग्रन्थि का बढ़ जाना (ENLARGEMENT OF PROSTATE GLAND) रोग परिचय कारण एवं लक्षण:- इसमें पौरुषग्रन्थि बगैर सूजन के बढ़ जाती है। यह रोग बिना कीटाणुओं के आक्रमण से हो जाता है। यही कारण है कि इसमें दर्द और ज्वर आदि नहीं होता है। प्राय: यह रोग 50 वर्ष की आयु के बाद ही होता है। प्रारम्भ में मूत्र में कुछ कठिनाई और रुकावट सी आती है, बाद में मूत्र बिना कष्ट के, सामान्य रूप से आने लगता है। रोग बढ़ जाने पर मूत्र बार-बार आता है, मूत्राशय मूत्र सें पूरा खाली नहीं होता, कुछ न कुछ मूत्र मूत्राशय में रुका ही रह जाता है। मूत्र करते समय रोगी को ऐसा महसूस होता है कि जैसे कोई चीज मूत्र को बाहर निकलने से रोक रही है। इस रोग के मुख्य कारण अत्यधिक मैथुन तथा अत्यधिक सुरापान है। यह रोग प्रायः तर मौसम (तर जलवायु) में रहने वालों को अधिक हुआ करता है। चिकित्सा:- इस रोग में खट्टे, ठन्डे और तर भोजनों और तरकारियों तथा देर से पचने वाले भोजनों यथा-दही, मट्टा, गोभी, बैंगन, अरबी (घुइयाँ) आदि का पूर्णतयः निषेध है। रोगी को मैथुन न करने की हिदायत दें। 'सोये के तैल' की मालिश करें। यदि औषधियों से रोगी ठीक न हो ...

श्वास संस्थान के रोगों की चिकित्सा (Treatment of diseases of the respiratory system.)

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 श्वास संस्थान के रोगों की चिकित्सा (Treatment of diseases of the respiratory system.) कास, खाँसी (COUGH) रोग परिचय, लक्षण एवं कारण:- खाँसी स्वयं में कोई रोग नहीं हैं बल्कि यह अन्य दूसरे रोगों का लक्षण भर है। यह सर्दी, न्यूमोनियां काली खाँसी, तपेदिक, दमा, ब्रोकाइटिस (श्वास नली में सूजन) प्लूरिसी और यकृत की खराबी आदि रोगों से हुआ करती है।   खाँसी के सम्बन्ध में लोकोक्ति प्रचलित है-लड़ाई की जड़ हाँसी और रोगों जड़ है खाँसी। " मोटेतौर पर यह 3 प्रकार की हुआ करती है। नोट:-खाँसी की सदैव गले और फेफड़ों के विकारों से उत्पन्न होती है। 1. सूखी खाँसी। 2. तर (बलगमी) खाँसी। 3. दौरे के रूप में आने वाली खाँसी। सूखी खाँसी:- इस खाँसी में बलगम नहीं निकलता। बहुत ज्यादा खाँसने पर थोड़ा सा ही बलगम निकल पाता है इस कारण रोगी की छाती में जकड़ाहट, महसूस होती है, ऐसी खाँसी दमा, न्यूमोनियां, तपेदिक, ब्रोंकाइटिस और प्लूरिसी की प्रथम अवस्था में आती है। तर (बलगमी खाँसी):- इस खाँसी में बलगम जरा सा खाँसने पर आराम से तथा अधिक मात्रा में निकलता है। अधिक बलगम का निकलना अच्छा नहीं होता है। ऐसी खाँसी बढ़ी हुई...