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Showing posts from February, 2023

जूस थेरेपी द्वारा शरीर में होने वाले लाभ और हानि । Advantages and disadvantages of body through juice therapy.

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Juice Therapy रस चिकित्सा जूस थेरेपी द्वारा शरीर में होने वाले लाभ और हानि । Advantages and disadvantages of body through juice therapy. जूस थेरेपी,  Juice therapy शरीर   के शुद्धिकरण, रोग मुक्ति और शक्ति स्फूर्ति व रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी के लिए जूस थेरेपी,  Juice therapy   बेजोड़ है। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में यह प्राकृतिक उपचार अपनाने से कायाकल्प हो जाता है। दोस्तो आइये जाने कुछ चुनिंदा फल-सब्जियों द्वारा जूस थेरेपी, Juice therapy  के वारे में और उनसे क्या-क्या लाभ और हानि हो सकती है कैसे इसका सेवन करें : फल-सब्जियों के रस (Juice) या रसाहार द्वारा चिकित्सा प्रायः सभी रोगों में उपयोगी हो सकती है। लेकिन इसका प्रयोग किस रूप में किसको करना चाहिए, इसके पीछे वैज्ञानिक तथ्य जुड़े होते हैं। रसों का प्रयोग कब करें और कब नहीं करना चाहिए यह भी जानना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि विभिन्न रसों के गुण धर्म जानना।        रस या Juice का प्रयोग स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायी है यह तो सभी जानते हैं, लेकिन साथ ही यह भी जान...

स्त्रियों की योनि से संबंधित अनेक रोग तथा उनका घरेलू विधि से उपचार (Many diseases related to women's vagina and their treatment with home remedies)

 स्त्रियों की योनि से संबंधित अनेक रोग तथा उनका घरेलू विधि से उपचार (Many diseases related to women's vagina and their treatment with home remedies) योनि - कपाट शोथ (VULVITIS), योनि - कपाट की खुजली (VULVA PRURITIS), योनि कपाट की फुन्सियाँ (VULVAR PIMPLES), योनिद्वार की रसूली (PUDENDAL CONDYLOMA), योनि - शोथ (VAGINITIS), योनि की खुजली (VULVA PRURITIS), योनि के घाव (ULCERS OF VAGINA), योनि का नासूर (VAGINAL FISTULA),  योनि - कपाट शोथ (VULVITIS)   रोग परिचय, कारण एवं लक्षण:- इस रोग में स्त्रियों की योनि के (योनिद्वार) और उस के दोनों ओर के ओष्ठों में सूजन हो जाती है। इसके मुख्य कारण- मैला कुचैला रहना, पाचन क्रिया की गड़बड़ी, बाहरी खुजली, मधुमेह रोग, श्वेत प्रदर, खून पतला हो जाना, सुजाक प्रथम बार संभोग क्रिया एवं प्रसूति पीड़ा के कष्ट आदि होते हैं। इसके लक्षणों में योनि कपाट और दोनों ओर के ओष्ठों में सूजन होकर दर्द होता है। शोथ के अधिक तीव्र होने पर स्त्री को ज्वर भी हो सकता है, यदि यह कष्ट सुजाक के कारण हो तो ओष्ठों के अन्दर 'बारथोलिन' ग्रन्थियाँ भी सूज जाती हैं, आस-पास ...

स्तनों का छोटा व ढीला हो जाना (Small and loose breasts.), स्तन का घाव (Breast sore), स्तनों में दुग्ध की अधिकता (Excess of milk in the breasts.), स्तनों में दुग्ध का घट जाना (loss of milk in breasts), स्तनों में दुग्ध रुक जाना (Engorgement of milk in the breasts)

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 स्त्री गुप्त रोगों की चिकित्सा स्तनों का छोटा व ढीला हो जाना (Small and loose breasts.), स्तन का घाव (Breast sore), स्तनों में दुग्ध की अधिकता (Excess of milk in the breasts.), स्तनों में दुग्ध का घट जाना (loss of milk in breasts), स्तनों में दुग्ध रुक जाना (Engorgement of milk in the breasts)   1. स्तनों का छोटा हो जाना (Reduction of breasts) रोग परिचय, कारण एवं लक्षण:- इस रोग में स्त्री के स्तन साधारण अवस्था से भी छोटे हो जाया करते हैं, उनका उभार ही नहीं रहता है। दूध उत्पादन की क्षमता में भी कमी हो जाया करती है। इस रोग के कारण स्त्री-सौन्दर्य भी फीका पड़ जाया करता है। इसका मुख्य कारण शारीरिक कमजोरी, रक्त विकार, दुबलापन, स्तनों के पालन, पोषण हेतु उचित मात्रा में रक्त का न पहुँचना, स्तनों से रक्त में जाने वाली नसों में सुद्दे पड़ जाना, हारमोन सम्बन्धी विकार तथा स्त्री गुप्तांग जन्मजात खराबी होना इत्यादि हैं। उपचार:- जैतून का विशुद्ध तैल स्तनों पर हल्के हाथों से धीरे-धीरे मालिश करें। इस क्रिया से स्तन की मांसपेशियां पुष्ट हो जाती हैं, स्तन क्षेत्र का रक्त संचार बढ़कर स्नाय...

योनि का तंग या बिल्कुल बन्द हो जाना (Tight or complete closure of the vagina.)

 योनि का तंग या बिल्कुल बन्द हो जाना (Tight or complete closure of the vagina.) रोग परिचय, कारण एवं लक्षण:- स्त्रियों का यह रोग कई प्रकार का होता है। यदि योनि बिल्कुल बन्द हो या इतनी अधिक संकुचित हो जाये कि सम्भोग क्रिया ही सम्पन्न न हो सके तो इसको अंग्रेजी में 'एटोसिया ऑफ वैजाइना' कहा जाता है। यदि मैथुन क्रिया में कष्ट हो तो इसे 'वैजाइनिसमस' कहा जाता है। इसके दो कारण होते हैं।  (1) जन्म से ही योनि का बन्द होना या न होना:- योनि मात्र पतली सी एक नाली होती है जिस से मासिक आया करता है तथा सम्भोग क्रिया सम्पन्न होती है और बच्चों की पैदाइश (जन्म) होता है। गर्भाशय के मुख के निकट या योनि के मध्य में कोई आप्राकृतिक मांस या मस्सा उत्पन्न होने से योनि में रुकावट पैदा हो जाती है। प्रायः ऐसा होता है कि कुमारी पर्दा (Hymen) हाइमन बहुत अधिक मोटा और बिना छेद के होता है। जिसके कारण योनि का मुख बन्द रहता है। ऐसी परिस्थिति में मासिक धर्म के समय गर्भाशय में उदरशूल जैसा दर्द उठा करता है, जो पेट पर हाथ दबाने से बढ़ जाया करता है। जब गर्भाशय में अधिक मात्रा में रक्त एकत्र हो जाया करता है तो...

गर्भ निरोध के कुछ घरेलू उपाय। (Some home remedies for birth control.) स्त्री पुरुष के यौन रोग एवं उनके समाधान। (Sexual diseases of men and women and their solutions.)

  गर्भ निरोध के कुछ घरेलू उपाय। (Some home remedies for birth control.) स्त्री पुरुष के यौन रोग एवं उनके समाधान। ( Sexual diseases of men and women and their solutions.)   • मासिक धर्म के दिनों में पुराना गुड़ औटाकर 15 दिनों तक लगातार पीने से गर्भ नहीं ठहरता है। • सम्भोग से पूर्व तथा पश्चात् (बाद में) गरम जल में मिली फिटकरी से योनि को धो देने से गर्भ स्थापित नहीं हो पाता है। इसी प्रकार का प्रयोग नीम के पत्तों के बने काढ़े का भी है।  • निबौली के तेल का फाया मासिक काल के दौरान लगातार 5 दिन योनि में रखने से गर्भ नहीं ठहरता है। • यदि किसी भी प्रकार के घी से स्पंज या रुई को तर करके योनि में रखकर सम्भोग किया जाये तो गर्भ नहीं ठहरता है। • चंपा का 1 पत्ता रात्रि को पानी में डालकर भिगो दें। दूसरे दिन प्रातः उसी पानी में उसी पत्ते को घोटकर मासिकधर्म के समय पिला देने से 1 साल तक तथा दो पत्ते घोटकर पिला देने से 2 साल तक गर्भ नहीं ठहरता है। • यदि 1 निबौली को चबाकर गाय के दूध के साथ निगल लिया जाये तो 1 वर्ष के लिए स्त्री बांझ हो जाती है। • मासिक धर्म समाप्त हो जाने के बाद 1 सफेद रत्त...