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Showing posts from November, 2020

जूस थेरेपी द्वारा शरीर में होने वाले लाभ और हानि । Advantages and disadvantages of body through juice therapy.

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Juice Therapy रस चिकित्सा जूस थेरेपी द्वारा शरीर में होने वाले लाभ और हानि । Advantages and disadvantages of body through juice therapy. जूस थेरेपी,  Juice therapy शरीर   के शुद्धिकरण, रोग मुक्ति और शक्ति स्फूर्ति व रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी के लिए जूस थेरेपी,  Juice therapy   बेजोड़ है। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में यह प्राकृतिक उपचार अपनाने से कायाकल्प हो जाता है। दोस्तो आइये जाने कुछ चुनिंदा फल-सब्जियों द्वारा जूस थेरेपी, Juice therapy  के वारे में और उनसे क्या-क्या लाभ और हानि हो सकती है कैसे इसका सेवन करें : फल-सब्जियों के रस (Juice) या रसाहार द्वारा चिकित्सा प्रायः सभी रोगों में उपयोगी हो सकती है। लेकिन इसका प्रयोग किस रूप में किसको करना चाहिए, इसके पीछे वैज्ञानिक तथ्य जुड़े होते हैं। रसों का प्रयोग कब करें और कब नहीं करना चाहिए यह भी जानना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि विभिन्न रसों के गुण धर्म जानना।        रस या Juice का प्रयोग स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायी है यह तो सभी जानते हैं, लेकिन साथ ही यह भी जान...

स्वप्न दोष (NOCTURNAL EMISSTION) का देशी जड़ी बूटियों व आयुर्वेदिक पेटेन्ट योग द्वारा उपचार।

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 स्वप्न दोष (NOCTURNAL EMISSTION)  रोग परिचय, लक्षण एवं कारण - स्वप्न दोष (Night fall or Night discharge) में नींद में रोगी को स्त्री का स्वप्न आता है, रोगी नींद में ही (स्वप्न में) उससे सम्भोग करता है, फल-स्वरूप वीर्यपात हो जाता है और कपड़े गन्दे हो जाते हैं। इस प्रकार बार-बार होने लग जाता है तो यह रोग समझा जाने लगता है। यदि स्वप्न दोष महीने में 1-2 बार कुंवारे मनुष्य को हो जाये और ऐसा होने से वह कोई शारीरिक कमजोरी महसूस न करे तो स्वप्न दोष को रोग नहीं समझा जाता है। अत्यधिक स्वप्न दोष होने पर शरीर का कमजोर होना, चेहरे की रौनक एवं सुन्दरता का नाश होना, शरीर में अनेकों रोग रहना, मस्तिष्कीय कमजोरी, आँखों का धंस जाना, दृष्टि कमजोर होना, कायरता, सिर में दर्द रहना, अल्प परिश्रम से ही थकावट हो जाना, सिर में भारीपन, कब्ज बनी रहना, शीघ्रपतन, मूत्र के साथ वीर्य जाना, खाली बैठने पर ऊँघने लगना, शरीर टूटना, कमर-दर्द, स्मरण शक्ति का अभाव, वीर्य का पतला पड़ जाना, आदि इस रोग के प्रधान लक्षण हुआ करते हैं। बुरे विचार, अति मैथुन, हस्त मैथुन, गुदा मैथुन, कब्ज, बदहजमी, चित्त सोना, अविवाहित रहन...