जूस थेरेपी द्वारा शरीर में होने वाले लाभ और हानि । Advantages and disadvantages of body through juice therapy.

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Juice Therapy रस चिकित्सा जूस थेरेपी द्वारा शरीर में होने वाले लाभ और हानि । Advantages and disadvantages of body through juice therapy. जूस थेरेपी,  Juice therapy शरीर   के शुद्धिकरण, रोग मुक्ति और शक्ति स्फूर्ति व रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी के लिए जूस थेरेपी,  Juice therapy   बेजोड़ है। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में यह प्राकृतिक उपचार अपनाने से कायाकल्प हो जाता है। दोस्तो आइये जाने कुछ चुनिंदा फल-सब्जियों द्वारा जूस थेरेपी, Juice therapy  के वारे में और उनसे क्या-क्या लाभ और हानि हो सकती है कैसे इसका सेवन करें : फल-सब्जियों के रस (Juice) या रसाहार द्वारा चिकित्सा प्रायः सभी रोगों में उपयोगी हो सकती है। लेकिन इसका प्रयोग किस रूप में किसको करना चाहिए, इसके पीछे वैज्ञानिक तथ्य जुड़े होते हैं। रसों का प्रयोग कब करें और कब नहीं करना चाहिए यह भी जानना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि विभिन्न रसों के गुण धर्म जानना।        रस या Juice का प्रयोग स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायी है यह तो सभी जानते हैं, लेकिन साथ ही यह भी जान...

हृदय का तेज धड़कना, और हृदय की जलन - Fast beating of the heart, and heartburn

हृदय का तेज धड़कना, और हृदय की जलन - Fast beating of the heart, and heartburn

  1. प्रातःकाल नाश्ते में एक प्लेट टुकड़े करके तले हुए अथवा उबाले गए प्याज के नित्य प्रति सेवन से मनुष्य को दिल के दौरे (heart attack) नहीं पड़ते। (प्याज से हृदय धमनियों में रक्त के थक्के नही बनते और इस प्रकार हृदय संभावित क्षति से सुरक्षित रहता है।)
  2. हृदय की धड़कन बढ़ना तथा रक्त गाढा होने की बीमारी में गाजर लाभ प्रदान करती है। हृदय कमजोर होने पर प्रतिदिन 2 बार गाजर का रस पीना चाहिए। धारोष्ण दूध अर्थात दूध पशु के थनों से निकालकर, छानकर, ताजा, बिना गर्म किए ही मिश्री या शहद, भिगोई हुई किशमिश का पानी मिलाकर 40 दिन पीने से वीर्य शुद्ध होता है। नेत्र ज्योति तथा स्मरण शक्ति बढ़ती है। खुजली, स्नायु दुर्बलता, बच्चों का सूखा रोग, क्षय रोग (टी•बी•) हिस्टीरिया तथा हृदय की धड़कन में लाभ होता है। छोटे दुर्बल बालकों को इस प्रयोग से बहुत ही लाभ होता है। इसे धीरे-धीरे चुस्की लेकर पिएं। हृदय की धड़कन यदि अधिक प्रतीत होती हो, तो सूखा धनिया और मिश्री समान मात्रा में मिलाकर नित्य 1 चम्मच भर की मात्रा में ठंडे जल से सेवन करने पर लाभ होता है।
  3. भुनी हींग, बायविडंग, काली मिर्च, मैनसिल और सेंधा नमक, प्रत्येक 10-10 ग्राम लेकर कूट-पीसकर कपड़छन करके सुरक्षित रख लें। यह आधा ग्राम दवा आधा चम्मच शहद में मिलाकर खाने से हृदय गति सामान्य हो जाती है।
  4. गाजर का ठंडा मुरब्बा सेवन करने से अधिक गर्मी के कारण बढ़ी हुई हृदय की धड़कन सामान्य हो जाती है।
  5. रात को गाजर को भूनकर छील लें और खुले में रख दें। प्रातःकाल के समय शक्कर और गुलाब जल मिलाकर खाने से हृदय की बढ़ी हुई धड़कन में लाभ होता है।
  6. नागफनी और थूहर दोनों का समान मात्रा में रस निकालकर पीने से हृदय की बढ़ी हुई धड़कन शांत हो जाती है।
  7. सूखा आंवला और मिश्री समान मात्रा में लेकर कूट-पीसकर सुरक्षित रख लें। इस दवा को 6 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन एक बार पानी के साथ सेवन करने से कुछ दिनों में ही हृदय का अधिक धड़कना व अन्य रोग शांत हो जाते है।
  8. अनार के ताजा पत्ते आधा पाव जल में घोटकर छान लें। इस रस का सुबह-शाम निरंतर सेवन करने से दिल की बढ़ी हुई धड़कन में लाभ होता है।
  9. 10 ग्राम रेहा के बीज मिट्टी के बर्तन में आधा किलो जल में भिगो दें। प्रातःकाल बीजों को मसलकर छान लें और थोड़ी-सी मिश्री मिलाकर सेवन करें। एक सप्ताह में हृदय की दुर्बलता और धड़कन ठीक हो जाती है।
  10. हृदय में दर्द व धड़कन के कष्ट में यदि रोगी अंगूर खाकर ही रहे, तो हृदय रोग शीघ्र ठीक जाते हैं। जब हृदय में दर्द और धड़कन अधिक हो, तो अंगूर का रस पीने से दर्द बन्द होता है तथा धड़कन सामान्य हो जाती है और थोड़ी देर में ही रोगी को आराम आ जाता है एवं रोग की आपातकालीन स्तिथि (emergency) दूर हो जाती है।

हृदय की जलन (Heartburn)

  1. खस और पीपरामूल का चूर्ण 6-6 ग्राम लेकर तथा घी में मिलाकर खाने से हृदय का तेज दर्द व जलन मिट जाती है।
  2. हींग को पहले भून लें, उसके बाद इसी मात्रा में काला जीरा, सफेद जीरा, अजवायन और सेंधा नमक पीसकर मिला लें। 1 बार मे यह दवा 212 ग्राम की मात्रा में ताजे पानी के साथ सेवन करने से हृदय की घबराहट और जलन शांत हो जाती है।
  3. लौंग को पीसकर व मिश्री मिलाकर शरबत बनाकर पीने से हृदय की जलन मिट जाती है।
धन्यवाद!

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