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जूस थेरेपी द्वारा शरीर में होने वाले लाभ और हानि । Advantages and disadvantages of body through juice therapy.

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Juice Therapy रस चिकित्सा जूस थेरेपी द्वारा शरीर में होने वाले लाभ और हानि । Advantages and disadvantages of body through juice therapy. जूस थेरेपी,  Juice therapy शरीर   के शुद्धिकरण, रोग मुक्ति और शक्ति स्फूर्ति व रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी के लिए जूस थेरेपी,  Juice therapy   बेजोड़ है। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में यह प्राकृतिक उपचार अपनाने से कायाकल्प हो जाता है। दोस्तो आइये जाने कुछ चुनिंदा फल-सब्जियों द्वारा जूस थेरेपी, Juice therapy  के वारे में और उनसे क्या-क्या लाभ और हानि हो सकती है कैसे इसका सेवन करें : फल-सब्जियों के रस (Juice) या रसाहार द्वारा चिकित्सा प्रायः सभी रोगों में उपयोगी हो सकती है। लेकिन इसका प्रयोग किस रूप में किसको करना चाहिए, इसके पीछे वैज्ञानिक तथ्य जुड़े होते हैं। रसों का प्रयोग कब करें और कब नहीं करना चाहिए यह भी जानना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि विभिन्न रसों के गुण धर्म जानना।        रस या Juice का प्रयोग स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायी है यह तो सभी जानते हैं, लेकिन साथ ही यह भी जान...

10, चमत्कारिक घरेलू उपचार (Miracle Home Remedies)

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10, चमत्कारिक घरेलू उपचार (Miracle Home Remedies) (1) कमर दर्द (Backache) महिलाओं की बहुत ही आम समस्या है कमर दर्द (Backache)। यदि आप या आपके मिलने वालों में इस तरह की समस्या है, तो घरेलू उपचार आपके लिए बेहद कारगर साबित हो सकता है।         अश्वगंधा 80 ग्राम, विधारा 80 ग्राम, मेथीदाना 80 ग्राम और सोंठ 20 ग्राम की मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें और कपडछन करके रख लें। रोजाना सुबह-शाम 3-5 ग्राम की मात्रा में गुनगुने पानी के साथ इस चूर्ण का सेवन करने से कमर दर्द (Backache) में पूरा लाभ मिलता है। और इसके साथ ही अजवायन और लहसुन सरसों के तेल में मिलाकर पका लें और उस तेल से मालिश भी करें अलौकिक लाभ प्राप्त होगा। (2) दांत दर्द (Toothache) दांतों व मसूड़ों के खराब होने पर उनमें दर्द, सूजन व मसूड़ों में पस पडने तथा मुंह से बदबू आने की समस्या उत्पन्न हो जाती है। इसके मुख्य कारण हैं दांतों की नियमित साफ सफाई न करना, ज़र्दा, तम्बाकू, पान, गुटखा आदि। ऐसी स्थिति में तत्काल सजग होकर किसी हकीम, वैध, या किसी डाॅक्टर से सलाह लेना चाहिए, या हमारे द्वारा बताये गये निम्नलि...

पुरुषों के गुप्त रोग व सेक्स समस्या (Male Sexual Problems in Hindi)

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पुरुषों के गुप्त रोग व सेक्स समस्या (Male Sexual Problems in Hindi) Male Sexual Problems in Hindi (गुप्त रोग): पुरुषों में गुप्त रोग या यौन समस्याएं (Male Sexual Problems) एक गम्भीर समस्या है जिस पर विचार किया जाना आवश्यक है। रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र के अनुसार, आज के समय में यौन समस्याओं (Sexual Problems/Gupt Rog) ने लाखों पुरुषों को प्रभावित कर रखा है। यौन स्वास्थ्य किसी भी व्यक्ति के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। तथा यह एक जोड़े के खुशहाल जीवन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।  Male Sexual Problems आज के समय में पुरुषों में यौन समस्याएं (Male Sexual Problems/Gupt Rog) और यौन रोग बहुत सामान्य बात हो गई है, जो यौन स्वास्थ्य के साथ-साथ सम्पूर्ण जीवन को प्रभावित करती हैं। यौन समस्याओं (Sexual Problems/Gupt Rog) के साथ कई प्रकार की समस्याएं सम्बंधित रहती हैं जो व्यक्ति के संपूर्ण स्वास्थ्य पर प्रभाव डालती हैं। इसलिए किसी भी व्यक्ति को इन समस्याओं को अनदेखा नहीं करना चाहिए और तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। आइए जानते हैं कि पुरुषों की यौन समस्याएं क्या हैं,...

गुप्त रोग लाइलाज नहीं है, बल्कि इसका इलाज संभव है।

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गुप्त रोग लाइलाज नहीं है, बल्कि इसका इलाज संभव है। यदि किसी गुप्त रोग की आशंका मन में हो या खुद को सैक्स करने में सक्षम न समझें तो तुरंत किसी योग्य यौन रोग विशेषज्ञ से सलाह लें। यकीनन गुप्त रोग का इलाज संभव है। सैक्स का जिक्र आते ही युवाओं के मन में एक विशेष प्रकार की सरसराहट होने लगती है। मन हसीन सपनों में खो जाता है, क्योंकि यह प्रक्रिया है, 2 जवां दिलों के आपसी मिलन / संबंध की  अकसर युवा जब स्त्री से यौन संबंध स्थापित करता है और वह जल्दी स्खलित हो जाता है, और युवा इसे अपनी शारीरिक कमजोरी या गुप्त रोग मान लेते हैं और उन्हें लगता है कि वे कभी शारीरिक संबंध स्थापित नहीं कर पाएंगे। बहुत से युवा अपने मन की बात किसी से संकोचवश कर नहीं पाते और हताशा का शिकार हो कर आत्महत्या तक कर लेते हैं। कुछ युवा नीम हकीमों के चक्कर में पड़ जाते हैं जो उन्हें पहले नामर्द ठहराते हैं और फिर शर्तिया इलाज की गारंटी दे कर लूटते रहते हैं। युवाओं को समझना चाहिए कि ऐसी समस्या मानसिक स्थिति के कारण उत्पन्न होती है। अतः युवाओं को यह बात अपने मन में भर लेनी चाहिए कि  ‘पहली रात में सैक्स न ...

सर्दियों (Winter) के मौसम में त्वचा की खूबसूरती को बरकरार रखेंगे यह उपाय।

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सर्दियों (Winter) के मौसम में त्वचा की खूबसूरती को बरकरार रखेंगे यह उपाय। सर्दियों (Winter)  के मौसम में त्वचा को कई समस्याओं से जूझना पड़ता है। ऐसी स्थिति में त्वचा (Skin) को कोमल (Soft) बनाए रखने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। आइए हम आपको बता रहे हैं,  सर्दियों (Winter)  में कैसे करें अपनी त्वचा (Skin) की देखभाल। साबुन की जगह मॉयश्चराइजिंग क्लींजर का प्रयोग करना चाहिए। ये त्वचा को रूखा नहीं होने देते और नुकसान भी नहीं पहुंचाते हैं। सर्दियों (Winter)  के मौसम में देर तक नहाने से बचना चाहिए। साथ ही साबुन का प्रयोग बहुत कम करना चाहिए, और स्क्रब का प्रयोग बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। यदि त्वचा ज्यादा रूखी है तो साबुन रहित क्लींजर का प्रयोग करें। नहाने के लिए गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें और नहाने का समय 10 मिनट से अधिक न रखें।  घरेलु उपाय सर्दियों (Winter) के मौसम में अपनी त्वचा (Skin) की देखभाल कुछ कुदरती चीजों के इस्तेमाल से भी कर सकते हैं। घरेलू उपायों से भी आपकी  त्वचा (Skin)  की सुंदरता  बरकरार रह स...

सर्दियों के मौसम में स्वस्थ और निरोगी रहने के लिए कुछ आसान घरेलू उपाय । Some easy home remedies to stay healthy and healthy during the winter season

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सर्दियों के मौसम में स्वस्थ और निरोगी रहने के लिए कुछ आसान घरेलू उपाय । Some easy home remedies to stay healthy and healthy during the winter season. सर्दियों में स्‍वस्‍थ रहने के उपाय और टिप्स- कुछ आसान घरेलू उपाय इस्तेमाल कर हम खुद को गर्म और स्‍वस्‍थ रख सकते हैं। इस बार की सर्दियों का मौसम शुरू हो गया है और इसके साथ ही सर्दी-खांसी जुखाम और बुखार के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। अक्सर लोग बीमार होने के बाद अपने खानपान में बदलाव के बारे में सोचते हैं, जबकि बीमारी होने से पहले ही अगर हम मौसम के अनुसार योग्य आहार लेते हैं तो शरीर को सर्दियों में स्वस्थ और निरोगी रखा जा सकता है। शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के नुस्खे- हमेशा कार्यशील रहें, पर्याप्त मात्रा में नींद पूरी करें और खानपान सही रखें। ठण्ड के मौसम में आप विभिन्न प्रकार के पोषक पदार्थ और जड़ी-बूटियों का सेवन करके अपने आप को सर्दियों में स्वास्थ्य और विभिन्न प्रकार के वायरल संक्रमण से बचा सकते हैं। सर्दियों (Winter) में स्वस्थ रहने के लिए हमें ऐसे आहार की जरुरत होती है जो शरीर को गर्म रखे और हमारे immunity...

खांसी (Cough) के घरेलू नुस्खे

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खांसी (Cough) के घरेलू नुस्खे शरीर में होने वाले विभिन्न रोगों के कारणों की प्रतिक्रिया खांसी है।सांस नली बन्द हो जाती है, जब हम सांस लेते हैं। और उसमें रुकावट पैदा होती है और छाती में सिकुड़न पैदा होकर हवा केे गुजरने में दबाव पैदा होता है। जब स्वरयंत्र खुल जाता है तो आराम मिलता है। स्वरयंत्र के बंद होने अथवा उसमें रुकावट पैदा होने के कारण धूल-मिट्टी, कीटाणु अथवा श्लेष्मा उत्पन्न होती है। खांसी का कारण सर्दी, जुकाम के अतिरिक्त गले और सांस की नलियों का संक्रमण, फेफड़े तथा दिल की बीमारियां भी हो सकती हैं। जब तक खांसी के मुख्य कारणों का सही ढंग से निदान न किया जाए, तब तक केवल खांसी के इलाज के लिए दवाएं पीने से विशेष लाभ नहीं होगा। इसलिए आवश्यक है कि पहले खांसी के मुख्य रोग का निदान किया जाए। खांसी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है। एक सूखी, जिसमें कफ निकलने में कठिनाई होती है, दूसरी बलगमी खांसी, परंतु एक तीसरे प्रकार की खांसी, “कुकुर खांसी”। सूखी खांसी में कफ निकलने में कठिनाई होती है। सूखी खांसी वास्तव में खांसी प्रारंभ होने का लक्षण है। बलगमी खांसी में थोड़ा खा...

मधुमेह (Diabetes) के लक्षण और उपचार (Symptoms and Treatment of diabetes)

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मधुमेह (Diabetes) के लक्षण और उपचार (Symptoms and Treatment of diabetes) मधुमेह (Diabetes) के मुख्य लक्षण 1. मूत्र की अधिकता  इसके रोगी के मूत्र के साथ शरीर से शर्करा (Sugar) भी निकलती है। अतः मूत्र पर मक्खी व चींटी बैठती हैं। जमीन पर मूत्र का धब्बा भी बन जाता है। दोषों के विकृत होने पर यकृत की विकृति से यह रोग पैदा होता है। परिणामस्वरूप शर्करा (Sugar) पाचन क्रिया में सहायक न होकर एक अस्वाभाविक रूप से संचित होने लगती है और फिर यह शर्करा (Sugar) रक्त में अधिक मात्रा में जा मिलती है। इस रोग के प्रति जागरुक रहने की अति आवश्यकता होती है, क्योंकि यह रोग धीरे धीरे उत्पन्न होता है और बहुत समय तक अपने आप को प्रकट नहीं करता, रोगी का ध्यान बहुत समय तक इसकी ओर जा ही नहीं पाता क्योंकि रोगी को शुरू शुरू में सामान्य सी दुर्बलता महसूस होती है, जिसे वह टाल जाता है। सामान्यतः  जैसे ही निम्न लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए तथा रक्त एवं मूत्र परीक्षण करवा लेना चाहिए। लक्षण :-  अधिक भूख प्यास, ज्यादा पेशाब आना, थकावट, अचानक वजन कम होना, जख्म का देर...

यूरिक एसिड़ के लक्षण, कारण एवं उपचार (Symptoms, region and treatment of uric acid)

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यूरिक एसिड़ के लक्षण, कारण एवं उपचार (Symptoms, region and treatment of uric acid) यूरिक एसिड़ के लक्षण (Symptoms of Uric Acid ) पैरों-जोड़ों में दर्द होना। पैरों की एडियों में दर्द रहना। गांठों में सूजन होना। जोड़ों में सुबह शाम तेज दर्द कम-ज्यादा होना। एक स्थान पर देर तक बैठने पर उठने में पैरों एड़ियों में असहनीय दर्द। फिर दर्द सामन्य हो जाना। पैरों, जोड़ो, उगलियों, गांठों में सूजन होना। शर्करा लेबल बढ़ना। इस तरह की समस्या होने पर तुरन्त यूरिक एसिड जांच करवायें। यूरिक एसिड नियत्रंण करने के तरीके (Treatment for Uric Acid) गोखरू, पुनर्वा की जड, सूखा आंवला इन तीनों को बराबर मात्रा में लेकर पाउडर बना लें, सुबह शाम एक-एक चम्मच लें सुबह को खाली पेट और शाम को खाना खाने के आधा घंटा पहले लेना है। ऐसा करने से यूरिक एसिड की समस्या जड़ से समाप्त हो जायेगी। यूरिक एसिड बढ़ने पर हाईड्रालिक फाइबर युक्त आहार खायें। जिसमें पालक, ब्रोकली, ओट्स, दलिया, इसबगोल भूसी फायदेमंद हैं। मूली 3-4 इंच लंबा टुकड़ा, खीरा 3-4 इंच लंबा टुकड़ा, करेला 3-4 इंच लंबा टुकड़ा, हरे धनिए की ...