शीघ्रपतन (PREMATURE EJACULATION) का उपचार
शीघ्रपतन एक आम समस्या है मगर हमारे समाज में इस समस्या से परेशान व्यक्ति को बुरी नजरों से देखा जाता है। किसी व्यक्ति के बारे में शीघ्रपतन की बात जब घर से बाहर निकलती है तो लोग उसे अलग-अलग नामों की संज्ञा देने लगते हैं। इस चीज से परेशान होकर लोग हकीम और सड़क के किनारे बैठकर दवा देने वालों पर भरोसा करके इलाज कराने लगते हैं। जिनसे फायदा होना तो दूर पैसा जरूर बर्बाद होता है। जबकि देखा जाए तो शीघ्रपतन कोई बड़ी समस्या नहीं है और इसका उपचार घरेलू नुस्खों द्वारा आसानी से किया जा सकता है।
शीघ्रपतन क्या है?
शीघ्रपतन का मतलब है कि वीर्य का जल्दी निकलना। यानि संभोग के दौरान या पहले पुरुषों का वीर्य स्खलित हो जाना शीघ्रपतन कहलाता है। स्त्री की कामोत्तेजना शांत होने से पहले या हस्तमैथुन क्रिया के दौरान यदि पुरुषों का वीर्य स्खलित हो जाता है तो इसका मतलब है कि वह शीघ्रपतन की समस्या से गुजर रहा है। ऐसे में आपको आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श करें या हमारे द्वारा बताई गई आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों व घरेलू नुस्खों द्वारा शीघ्रपतन की समस्या को आसानी से दूर कर सकते हैं।
शीघ्रपतन के कारण
शीघ्रपतन के दो कारण हैं- प्राइमरी और सेकेंडरी शीघ्रपतन की समस्या पहली बार या किसी नए पार्टनर के साथ संभोग करने के दौरान कामोत्तेजना के ज्यादा प्रवाह होने के चलते भी हो सकता है। अगर लंबे समय के बाद संभोग किया जाए तो भी शीघ्रपतन की समस्या हो सकती है। इसके अलावा अपने पार्टनर के बीच के रिश्तों के बारे में तनाव या ज्यादा सोचना भी शीघ्रपतन में मुख्य भूमिका निभाता है। घर-परिवार को लेकर या किसी भी बात का तनाव भी शीघ्रपतन का कारण हो सकता है।
शीघ्रपतन के लक्षण
- बार-बार प्रयास करने पर भी संभोग के दौरान 1 मिनट भी न रोक पाना।
- संभोग को टालना।
- संभोग करने के बाद पार्टनर को संतुष्ट नहीं कर पाना।
- संभोग करने से पहले मन में शीघ्रपतन का डर सताना।
शीघ्रपतन का उपचार
- 1 ग्राम बारीक पिसी हुई राल को रात्रि में सोते समय दूध के साथ खाने से शीघ्रपतन दूर होता है।
- बरगद के कच्चे फलों को छाया में सुखाकर पीसकर सुरक्षित रख लें और इसका चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 10 ग्राम की मात्रा में प्रातःकाल गाय के दूध के साथ सेवन करने से शीघ्रपतन व स्वप्नदोष मिटता है।
- बरगद के वृक्ष की छाल को सुखाकर बारीक पीसें और इसकी समान मात्रा में मिश्री मिलाकर सुरक्षित रख लें। इस चूर्ण को 6-6 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम गाय के दूध के साथ सेवन करने से शीघ्रपतन व स्वप्नदोष रोग दूर हो जाता हैं।
- अफीम 1 माशा, जायफल 2 माशा, लौंग 2 माशा और मिश्री एक तोला लेकर पीसकर 13 गोलियां बना लें। यह 1 गोली सहवास से 1 घंटे पूर्व सेवन करने से 'स्तंभन' होता है।
- तुलसी के बीज 1 तोला, अकरकरा 2 तोला और शक्कर 3 तोला लेकर, पीसकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण रात को 1 माशे की मात्रा में दूध के साथ सेवन करने से शीघ्रपतन रोग मिटता है।
- सफेद मूसली और कौंच के बीज को समान मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर सुरक्षित रख लें। इस चूर्ण को रात्रि में सोते समय 4 माशे की मात्रा में लेकर व दूध में उबालकर पीने से शीघ्रपतन मिटता है।
- काले तिल और दाल चीनी समान मात्रा में लेकर पीस लें और फिर शहद मिलाकर 7-7 माशे की गोलियां बना लें। रात्रि को सोते समय 1 गोली पान के साथ खाने से शीघ्रपतन नहीं होता है।
- पांच अंडो की जर्दी में 1.50 ग्राम असली हीरा हींग (असली शुद्ध हींग को ही 'हीरा हींग' कहते है।) मिलाकर खाने से मैथुन इच्छा में वृद्धि होती है।
- आधा किलो इमली के बीज लेकर 4 दिन पानी मे भिगोए और फिर छिलके उतारकर छाया में सुखा लें। सूखने पर इन्हें समान मात्रा में मिश्री मिलाकर कूट पीसकर सुरक्षित रख लें और चौथाई चम्मच भर नित्य दूध से सुबह-शाम (दिन में 2 बार) फंकी लें। इस प्रयोग को निरंतर 50 दिन करने से शीघ्रपतन रोग दूर होगा तथा वीर्य गाढा होगा।
- शीघ्रपतन के रोग से ग्रसित व पतले वीर्य वाले रोगियों को दो छुहारे नित्य प्रातः सेवन करने से लाभ होता है।
- इसबगोल, शरबत खसखस और मिश्री (प्रत्येक 5-5 ग्राम) पानी मे मिलाकर पीने से शीघ्रपतन का रोग दूर होता है।
- तुलसी की जड़ या बीज चौथाई चम्मच लेकर पान में रखकर खाने से शीघ्रपतन का रोग दूर होता है, वीर्य पुष्ट होता है तथा मैथुन काल में देर तक रुकावट होती है। (तुलसी के बीज 60 ग्राम और मिश्री 75 ग्राम लेकर दोनों को पीस लें और नित्य 3 ग्राम की मात्रा में दूध के साथ सेवन करें। इस प्रयोग से धातु दुर्बलता में अवश्य लाभ होता है।) अथवा 3 ग्राम तुलसी के बीज अथवा तुलसी की जड़ का चूर्ण समान मात्रा में पुराने गुड़ में मिलाकर दूध के साथ सेवन करने से पुरुषत्व (मर्दानगी) की वृद्धि होती है। पतला वीर्य गाढा होता है तथा वीर्य वृद्धि होती है। शरीर में गर्मी और शक्ति उत्पन्न होती है एवं गैस व कफ से उत्पन्न होने वाले अनेक विकार स्वतः ही दूर हो जाते हैं। प्रयोग 40 दिन निरंतर जारी रखें।
धन्यवाद!
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