जूस थेरेपी द्वारा शरीर में होने वाले लाभ और हानि । Advantages and disadvantages of body through juice therapy.

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Juice Therapy रस चिकित्सा जूस थेरेपी द्वारा शरीर में होने वाले लाभ और हानि । Advantages and disadvantages of body through juice therapy. जूस थेरेपी,  Juice therapy शरीर   के शुद्धिकरण, रोग मुक्ति और शक्ति स्फूर्ति व रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी के लिए जूस थेरेपी,  Juice therapy   बेजोड़ है। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में यह प्राकृतिक उपचार अपनाने से कायाकल्प हो जाता है। दोस्तो आइये जाने कुछ चुनिंदा फल-सब्जियों द्वारा जूस थेरेपी, Juice therapy  के वारे में और उनसे क्या-क्या लाभ और हानि हो सकती है कैसे इसका सेवन करें : फल-सब्जियों के रस (Juice) या रसाहार द्वारा चिकित्सा प्रायः सभी रोगों में उपयोगी हो सकती है। लेकिन इसका प्रयोग किस रूप में किसको करना चाहिए, इसके पीछे वैज्ञानिक तथ्य जुड़े होते हैं। रसों का प्रयोग कब करें और कब नहीं करना चाहिए यह भी जानना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि विभिन्न रसों के गुण धर्म जानना।        रस या Juice का प्रयोग स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायी है यह तो सभी जानते हैं, लेकिन साथ ही यह भी जान...

नामर्दी का उपचार (Treatment of impotence)

नामर्दी का उपचार (Treatment of impotence)


  1. बहेड़े का चूर्ण और गुड़ 6-6 माशा मिलाकर प्रतिदिन खाने से नपुंसकता मिट जाती है।
  2. महुए के 2.5 तोला फूलों को 250 ग्राम दूध में उबालकर पीने से कमजोरी की नपुंसकता मिट जाती है।
  3. सफेद मूसली 250 ग्राम का बारीक चूर्ण बनाकर 2 किलो दूध में मिलाकर खोया (मावा) बना लें। फिर 250 ग्राम घी डालकर इस खोए को भून लें और ठंडा हो जाने पर आधा किलो पिसी हुई शक्कर मिलाकर इसे थाली में जमा दें। इसको सुबह-शाम 20 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से "काम-शक्ति" में वृद्धि होती है।
  4. सफेद प्याज को कूटकर 2 किलो रस निकालें और इसमें 1 किलो शुद्ध शहद मिलाकर किसी कलईदार बर्तन में धीमी आग पर चढ़ा दें। जब प्याज का रस जल जाए और शहद मात्र शेष बचे, तब आग से उतारकर उसमें आधा किलो सफेद मूसली का चूर्ण मिलाकर चीनी या शीशे के बर्तन में सुरक्षित रख लें। इसे 10 से 20 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से नपुंसकता (नामर्दी) मिट जाती है।
  5. 10 ग्राम असगंध नागौरी के बारीक चूर्ण को गाय के आधा किलो दूध में उबालें। जब 400 ग्राम दूध शेष रह जाए, तब उसमें शहद मिलाकर 40 दिन तक सेवन करने से काम-शक्ति बढ़ती है।
  6. 1.5 ग्राम कुलीजन (कुलंजन)  के चूर्ण को 10 ग्राम शहद में मिलाकर खाने और ऊपर से गाय के दूध में शहद मिलाकर पीने से काम-शक्ति में वृद्धि होती है।
  7. मालकांगनी के दाने 50 ग्राम और 25 ग्राम शक्कर को आधा किलो गाय के दूध में डालकर आग पर चढ़ा दें। जब दूध का खोया बन जाए, तब उतारकर बड़े बेर के आकार की गोलियां बना लें। यह 1-1 गोली सुबह-शाम गाय के दूध के साथ सेवन करने से नपुंसकता मिट जाती है।
  8. 62 ग्राम लहसुन को देसी घी में तलकर नित्य खाने से नपुंसकता नष्ट होती है। काम-शक्ति बढ़ती है।
  9. तुलसी की मंजरी अथवा जड़ 1.50 से 3 माशे तक की मात्रा में समान मात्रा में गुड़ मिलाकर धारोष्ण दूध के साथ सेवन करने से नपुंसकता दूर होती है।
  10. तुलसी के बीज 1 माशा तक पीसकर दूध के साथ रात को सोते समय सेवन करने से नपुंसकता मिट जाती है।
  11. सहवास से 1 घंटा पूर्व शिश्न पर 1 रत्ती घी की मालिश करने से नपुंसकता नहीं रहती है।
  12. जायफल और बड़ी (सुर्ख) इलायची 1-1 तोला, जावित्री 1.5 माशा और अफीम 4 रत्ती का चूर्ण बनाकर, यह 1 माशा चूर्ण शहद में मिलाकर सर्दी की ऋतु में 28 दिन सेवन करने से नपुंसकता मिट जाती है।
  13. गेहूं का आटा और ग्वारपाठे का गुदा समान मात्रा में लेकर घी मिला लें, फिर इसके दुगने वजन के बराबर शक्कर लेकर हलवा बनाकर खाने से 7 दिन में ही नपुंसकता दूर होती है।

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