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Showing posts from November, 2020

लिंग में वृद्धि करने के लिए कुछ सामान्य घरेलू उपाय: (Some common home remedies to enlarge penis.)

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 लिंग में वृद्धि करने के लिए कुछ सामान्य घरेलू उपाय: (Some common home remedies to enlarge penis.) 1. व्यायाम और स्ट्रेचिंग:  कुछ व्यायाम और स्ट्रेचिंग तकनीकें लिंग के आकार और कार्य में सुधार करने में मदद कर सकती हैं। जेलीग्रैब, केगल व्यायाम, और स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज कुछ उदाहरण हैं। 2. आहार और पोषण:  संतुलित आहार और उचित पोषण सेहत के लिए महत्वपूर्ण है। कुछ पूरक जैसे विटामिन, मिनरल्स, और हर्बल सप्लीमेंट्स का सेवन भी लाभकारी हो सकता है, लेकिन इन्हें लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श करना आवश्यक है। 3. डिवाइस और उपकरण:  कुछ डिवाइस जैसे एक्सटेंडर और वैक्यूम पंप का उपयोग लिंग वृद्धि के लिए किया जाता है। इनका उपयोग सावधानी से और निर्देशों के अनुसार करना चाहिए। 4. तनाव प्रबंधन और मानसिक स्वास्थ्य:  तनाव और मानसिक स्वास्थ्य का लिंग स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ सकता है। योग, ध्यान, और अन्य तनाव प्रबंधन तकनीकें सहायक हो सकती हैं। 5. स्वच्छता और स्वास्थ्य:  लिंग की स्वच्छता बनाए रखना और नियमित स्वास्थ्य जांच करवाना भी महत्वपूर्ण है। नोट: किसी भी नए उपाय या उपचार को अपनाने स...

स्वप्न दोष (NOCTURNAL EMISSTION) का देशी जड़ी बूटियों व आयुर्वेदिक पेटेन्ट योग द्वारा उपचार।

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 स्वप्न दोष (NOCTURNAL EMISSTION)  रोग परिचय, लक्षण एवं कारण - स्वप्न दोष (Night fall or Night discharge) में नींद में रोगी को स्त्री का स्वप्न आता है, रोगी नींद में ही (स्वप्न में) उससे सम्भोग करता है, फल-स्वरूप वीर्यपात हो जाता है और कपड़े गन्दे हो जाते हैं। इस प्रकार बार-बार होने लग जाता है तो यह रोग समझा जाने लगता है। यदि स्वप्न दोष महीने में 1-2 बार कुंवारे मनुष्य को हो जाये और ऐसा होने से वह कोई शारीरिक कमजोरी महसूस न करे तो स्वप्न दोष को रोग नहीं समझा जाता है। अत्यधिक स्वप्न दोष होने पर शरीर का कमजोर होना, चेहरे की रौनक एवं सुन्दरता का नाश होना, शरीर में अनेकों रोग रहना, मस्तिष्कीय कमजोरी, आँखों का धंस जाना, दृष्टि कमजोर होना, कायरता, सिर में दर्द रहना, अल्प परिश्रम से ही थकावट हो जाना, सिर में भारीपन, कब्ज बनी रहना, शीघ्रपतन, मूत्र के साथ वीर्य जाना, खाली बैठने पर ऊँघने लगना, शरीर टूटना, कमर-दर्द, स्मरण शक्ति का अभाव, वीर्य का पतला पड़ जाना, आदि इस रोग के प्रधान लक्षण हुआ करते हैं। बुरे विचार, अति मैथुन, हस्त मैथुन, गुदा मैथुन, कब्ज, बदहजमी, चित्त सोना, अविवाहित रहन...